*तृण को तीर बनाना है*
इतिहासों की यह बोझिल गाथा ,
दबा पड़ा उसमें सच का लावा,
जब तब फूट फूट कर कहता ,
देखो भारत को किस किसने तारा।
पृष्ठों में जो लिखा गया है ,
पूर्ण सत्य वह नहीं दर्शाता ,
मिट्टी खोद खोदकर देखो ,
बिखरा पड़ा है सत्य हमारा।
मैकाले ने जो हमें पढ़वाया,
मुगलों ने जो कुछ बनवाया ,
मार्क्सवाद ने जो लिखवाया,
वह तो नहीं इतिहास हमारा।
दाहिर से लेकर राणा तक ,
वीर शिवा से रंजीत राज तक ,
गुरुओं का बलिदान समर्पण,
घर घर में यह दीप जलाना ।
भारत ना कभी किसी से हारा,
आक्रान्ता को ना शासक माना ,
कालखण्ड औ भूमि भाग पर ,
बजता रहा प्रबल युद्ध नगाड़ा ।
दीन-हीन हम कभी नहीं थे ,
बस यह की हम सरल बहुत थे ,
कुटिलों को भी अपना समझा ,
यही त्रुटि इतिहास हमारा ।
और नहीं कुछ हमको करना ,
देव संस्कृति का पालन करना ,
पर यह भी अब ध्यान है रखना ,
शस्त्र- शास्त्र का संतुलन रखना ।
बन सबल अब लिखो सत्य को ,
भारत की वह स्वर्णिम गाथा ,
अपने स्व का भान कराकर ,
अब तृण को भी है तीर बनाना ।।
प्राँजल शुकुल
12 03 2023