Perceptions !
Friday, 7 June 2024
मै ना मानूं हार
Sunday, 12 March 2023
तृण को तीर बनाना है
Friday, 4 November 2022
अंतर
बात जहां तक ले जानी है ,
पहले सोच वहां पहुचे ,
मन तो ठहरा चंचल भंवरा ,
आज यहाँ कल कहाँ टिके ।
धरती से देखो दूर गगन तक ,
सब कुछ कितना नवल दिखे ,
जब देखो चढ़कर पर्वत पर ,
धरती ही कुछ और दिखे ।
यहाँ मेघ जो जल बरसाते ,
पर्वत पर वह बन हिम गिरे ,
यहाँ कलकल कर बहती नदिया ,
वहां ठोस हिमखंड बने।
कहाँ तुम्हे जाना है राही ,
तय पहले यह लक्ष्य करो ,
और लक्ष्य पर जब मैं पहुंचू ,
क्या करना यह ध्यान करो ।
मार्ग अनेकों मिल जाऐंगे,
पर तुम फिर भी मनन करो ,
चयन मार्ग का बड़ा झमेला ,
सरल कठिन का भेद करो ।
मार्ग लक्ष्य तक बडा है लम्बा ,
समय अधिक होगा इसमें ही व्यय ,
अब यह भी बस है तुम्हें सोचना ,
क्या नहीं इसमें हो अपना व्यय ।
इस मार्ग में कांटो के संग समझो ,
डग डग पर है बिखरा मैला ,
कैसे अपने इस अंतः करण को ,
देखो यत्नों से निर्मल स्वच्छ रखना ।
प्राँजल शुकुल
23 06 2022
प्रवाह
नदी किनारे बैठ देखता ,
तिनके पत्तों का बह जाना ,
वेग जहाँ लेकर के जाता ,
वहीं उन्हे है रमते जाना ।
जीवन का आनंद यही है ,
बैठो माया की लहरों पर ,
करो नही संघर्ष व्यर्थ का ,
जहाँ लहर हो बहते जाना।
लहरों की इस ऊंच नीच में ,
सांसो को ऐसे ही थामे ,
देखो तट के दृश्य मनोरम ,
कुछ भी यहाँ ना रहने वाला ।
है आज लहर के उपर जो पत्ता ,
धीरे धीरे वह गल जाएगा ,
तब वह लहर के नीचे जाकर ,
नदिया का ही हिस्सा बन जाएगा।
:
प्राँजल शुकुल / 20 जून 2022
भारत पुनः अखण्ड होगा
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
यह समय नहीं विश्राम का ,
यह बेला नहीं विराम की ,
ये मोड़ है निश्चय को दृढ़ कर ,
पाने , भारत के सम्मान का ।
ना देखो जग की ओर सोच ,
कि वे क्या-कैसे हमें रोकेंगे ,
तुम देखो आस ले हिन्द खड़ा ,
कब स्थापित हो धर्म , शौर्य से ।
वो वीर शस्त्र ले खड़ा सजग ,
गौरव-गाथा का निज मान लिऐ ,
मन में पर उसके कितनी दुविधा ,
वो कब तक नित स्व-प्राण तजे ।
तुम तो बस यह इस बार करो ,
यह समय ना फिर से आएगा ,
जो आज किया वो रहे सदा ,
आगे ना कुछ भी हो पाएगा ।
तुम पर हम वारे जाते है ,
तन मन से हैं सब साथ खड़े ,
हर स्थिति संभालेंगे मिलकर ,
जो भी हो वो देखा जाऐगा ।
जो दोष दशकों से है मढ़ा ,
हम भारत की संतानों पर ,
जो पीड़ा हमने वर्षों सही ,
अपने ही घर के गद्दारों से ।
वह कलंक धुला दो माथे से ,
चाहे जो कीमत लगे अभी ,
परिस्थिति ना ऐसी फिर आऐगी ,
आने वाले शत कालों तक ।
जो रहें साथ स्वागत उनका ,
पर जो देखें स्वप्न विखंडन का ,
उनको उनका गंतव्य दिखा ,
पहुँचा दो जलती कबरो तक ।
ऐसा भीषण दो सबक सिखा ,
भारत के हर उस अपराधी को ,
साहस ना कर कोई पुनः सके ,
वैसा यत्न कभी कर सकने को ।
नही चाहिए वो धारा जो ,
धारा का ही अवरोध करे ,
नहीं सहमत उस अनुच्छेद से ,
जो जन-जन का विच्छेद करे ।
अब समय प्रबल है वीरों का ,
बस तेज राष्ट्र का बढ़ा चले ,
जो खण्डित हुआ वो भी लेंगे ,
औ भारत अखण्ड होगा फिर से ।
: प्राँजल शुक्ल
Time scale
7 levels of time
Relativity
The smaller is the life span , the faster is the time interval of the minutest observable / perceivable time gap . Time moves faster at this level .
The longer is the lifespan , slower is the speed of time .
To attain a higher level of existence , the soul needs to raise its level & tune up to a state of higher level vibration .
At the highest level , this vibration is strongest but with a very low rhythmic frequency and a very long wave length .
मैं मतवाला
चलने दो मुझे राह पकड़कर
होगे तुम इस जंगल के राजा
मैं तो हूँ बस , हाथी-मतवाला
नहीं मुझे कुछ पाने की इच्छा
खाली पेट भी भरा हुआ है
जो ठीक लगे वह ही मैं करता
मुझे नही कोई कैसी भी चिंता
तुम ऊंचे बैठे हो या नीचे
फरक मुझे नहीं पडता इसका
मैं तो स्नेह का भाव समझता
सरल मनुज पर मरता मिटता
मेरा राजा राम , न दूजा
योगी केशव ही है गुरु मेरा
महादेव का हूँ मैं सेवक
जगदम्बा है मेरी माता
जीव रूप में हूँ मैं जन्मा
मायावश मैं-मैं मैं करता
नहीं यहाँ मेरा मन रमता
पूर्ण शून्य ही अपना डेरा