तूफानों का क्या ,
उन्हे तो आना है ,
तबाही मचाना है ,
और चले जाना है ।
बात तो हौसलों की है ,
तूफानों से टकराना है ,
सब मिटता देखकर भी ,
बचे हुए को सम्हालना है ।
दिल से रिसती पीड़ा को ,
इन्हे ही दबाना है ,
उखडती सांसो को फिर ,
इन्हें ही तो चलाना है ।
- प्राँजल शुकुल
17 मई 2021
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