Friday, 4 November 2022

कर्तव्य पथ

कर्तव्य पथ

कर्तव्य पथ पर बढ़ चला ,
मैं अडिग , केशव सा अडिग ,
कंटकों की चिंता नही ,
मैं अटल , माधव सा अटल ।

एक स्वप्न लेकर नेत्र में,
मै चल पड़ा हूँ अविचल ,
लक्ष्य जब तक ना प्राप्त हो ,
मैं अब ना बैठूं हो शिथिल ।

मेरे रक्त का हर एक कण ,
है कह रहा हर एक पल ,
जब तक है मुझमें लालिमा ,
तू बढ़ता चल , बढ़ता ही चल ।

मुट्ठी में मेरी भारत की रज ,
भरती देह में ऊर्जा प्रबल ,
साहस है किसमें रोक ले ,
मैं पाऊं निज ध्येय सकल ।

ना भय है , ना चिंता कोई,
ना द्वेष है , ना अनुराग ही ,
ना मन में है कोई लालसा ,
बस लक्ष्य है अपना साधना ।

और लक्ष्य यही सब जयकार करें ,
समझें और पालन नित्य करें ,
भारत का मंत्र सद्भाव का ,
विश्व के सकल कल्याण का ।

: प्राँजल शुक्ल 

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